एकादशी 2026
वर्ष की प्रत्येक एकादशी उसके पारम्परिक नाम, अगले दिन के पारण समय और तिथि निर्धारण के कारण सहित।
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लागू नियम: स्मार्त — आपकी गणना प्रोफ़ाइल पहले स्मार्त तिथि दिखाती है (अधिकांश उत्तर भारतीय पंचांगों की तरह: सूर्योदय पर एकादशी, वृद्धि, क्षय और द्वादशी के नियम एकादशी पृष्ठ पर); वैष्णव (इस्कॉन) तिथि सदा साथ में दिखती है। गणना प्रोफ़ाइल के बारे में
एकादशी सूची 2026
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सोमवार, 7 सितंबर 2026
अजा एकादशी
श्रावण कृष्ण पक्ष (अमान्त) · भाद्रपद कृष्ण पक्ष (पूर्णिमान्त)
पारण · 08/09/2026 (मंगल) से हरि वासर समाप्त होने के बाद प्रातःकाल (दिन के प्रथम पंचमांश) में पारण।स्मार्त और वैष्णव तिथियाँ — दोनों परम्पराओं में व्रत इसी दिन है। स्मार्त: 07/09/2026 (सोम) वैष्णव (इस्कॉन): 07/09/2026 (सोम)
- स्मार्त 07/09/2026 (सोम) पारण · 08/09/2026 (मंगल): से — हरि वासर समाप्त होने के बाद प्रातःकाल (दिन के प्रथम पंचमांश) में पारण। स्मार्त: इस दिन सूर्योदय के समय एकादशी है।
- वैष्णव (इस्कॉन) 07/09/2026 (सोम) पारण · 08/09/2026 (मंगल): से — इस्कॉन (GCal) नियम: सूर्योदय से दिनमान का एक तिहाई तक। वैष्णव: शुद्ध एकादशी — सूर्योदय से 96 मिनट पहले, अरुणोदय में ही एकादशी चल रही है।
यही तिथि क्यों?
- स्मार्त: इस दिन सूर्योदय के समय एकादशी है।
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मंगलवार, 22 सितंबर 2026
परिवर्तिनी (पार्श्व) एकादशी
भाद्रपद शुक्ल पक्ष (अमान्त और पूर्णिमान्त में एक ही नाम)
पारण · 23/09/2026 (बुध) से हरि वासर समाप्त होने के बाद प्रातःकाल (दिन के प्रथम पंचमांश) में पारण।स्मार्त और वैष्णव तिथियाँ — दोनों परम्पराओं में व्रत इसी दिन है। स्मार्त: 22/09/2026 (मंगल) वैष्णव (इस्कॉन): 22/09/2026 (मंगल)
- स्मार्त 22/09/2026 (मंगल) पारण · 23/09/2026 (बुध): से — हरि वासर समाप्त होने के बाद प्रातःकाल (दिन के प्रथम पंचमांश) में पारण। स्मार्त: इस दिन सूर्योदय के समय एकादशी है।
- वैष्णव (इस्कॉन) 22/09/2026 (मंगल) पारण · 23/09/2026 (बुध): से — इस्कॉन (GCal) नियम: सूर्योदय से दिनमान का एक तिहाई तक। वैष्णव: शुद्ध एकादशी — सूर्योदय से 96 मिनट पहले, अरुणोदय में ही एकादशी चल रही है।
यही तिथि क्यों?
- स्मार्त: इस दिन सूर्योदय के समय एकादशी है।
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मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026
इन्दिरा एकादशी
भाद्रपद कृष्ण पक्ष (अमान्त) · आश्विन कृष्ण पक्ष (पूर्णिमान्त)
पारण · 07/10/2026 (बुध) से हरि वासर समाप्त होने के बाद प्रातःकाल (दिन के प्रथम पंचमांश) में पारण।स्मार्त और वैष्णव तिथियाँ — दोनों परम्पराओं में व्रत इसी दिन है। स्मार्त: 06/10/2026 (मंगल) वैष्णव (इस्कॉन): 06/10/2026 (मंगल)
- स्मार्त 06/10/2026 (मंगल) पारण · 07/10/2026 (बुध): से — हरि वासर समाप्त होने के बाद प्रातःकाल (दिन के प्रथम पंचमांश) में पारण। स्मार्त: इस दिन सूर्योदय के समय एकादशी है।
- वैष्णव (इस्कॉन) 06/10/2026 (मंगल) पारण · 07/10/2026 (बुध): से — इस्कॉन (GCal) नियम: सूर्योदय से दिनमान का एक तिहाई तक। वैष्णव: शुद्ध एकादशी — सूर्योदय से 96 मिनट पहले, अरुणोदय में ही एकादशी चल रही है।
यही तिथि क्यों?
- स्मार्त: इस दिन सूर्योदय के समय एकादशी है।
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गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026
पापांकुशा एकादशी
आश्विन शुक्ल पक्ष (अमान्त और पूर्णिमान्त में एक ही नाम)
पारण · 23/10/2026 (शुक्र) से हरि वासर समाप्त होने के बाद प्रातःकाल (दिन के प्रथम पंचमांश) में पारण।स्मार्त और वैष्णव तिथियाँ — दोनों परम्पराओं में व्रत इसी दिन है। स्मार्त: 22/10/2026 (गुरु) वैष्णव (इस्कॉन): 22/10/2026 (गुरु)
- स्मार्त 22/10/2026 (गुरु) पारण · 23/10/2026 (शुक्र): से — हरि वासर समाप्त होने के बाद प्रातःकाल (दिन के प्रथम पंचमांश) में पारण। स्मार्त: इस दिन सूर्योदय के समय एकादशी है।
- वैष्णव (इस्कॉन) 22/10/2026 (गुरु) पारण · 23/10/2026 (शुक्र): से — इस्कॉन (GCal) नियम: सूर्योदय से दिनमान का एक तिहाई तक। वैष्णव: शुद्ध एकादशी — सूर्योदय से 96 मिनट पहले, अरुणोदय में ही एकादशी चल रही है।
यही तिथि क्यों?
- स्मार्त: इस दिन सूर्योदय के समय एकादशी है।
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अगली · कल
गुरुवार, 5 नवंबर 2026
रमा एकादशी
आश्विन कृष्ण पक्ष (अमान्त) · कार्तिक कृष्ण पक्ष (पूर्णिमान्त)
पारण · 06/11/2026 (शुक्र) से हरि वासर समाप्त होने के बाद प्रातःकाल (दिन के प्रथम पंचमांश) में पारण।स्मार्त और वैष्णव तिथियाँ — दोनों परम्पराओं में व्रत इसी दिन है। स्मार्त: 05/11/2026 (गुरु) वैष्णव (इस्कॉन): 05/11/2026 (गुरु)
- स्मार्त 05/11/2026 (गुरु) पारण · 06/11/2026 (शुक्र): से — हरि वासर समाप्त होने के बाद प्रातःकाल (दिन के प्रथम पंचमांश) में पारण। स्मार्त: इस दिन सूर्योदय के समय एकादशी है।
- वैष्णव (इस्कॉन) 05/11/2026 (गुरु) पारण · 06/11/2026 (शुक्र): से — इस्कॉन (GCal) नियम: सूर्योदय से दिनमान का एक तिहाई तक। वैष्णव: शुद्ध एकादशी — सूर्योदय से 96 मिनट पहले, अरुणोदय में ही एकादशी चल रही है।
यही तिथि क्यों?
- स्मार्त: इस दिन सूर्योदय के समय एकादशी है।
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शुक्रवार, 20 नवंबर 2026
देवउठनी (प्रबोधिनी) एकादशी
कार्तिक शुक्ल पक्ष (अमान्त और पूर्णिमान्त में एक ही नाम)
पारण · 21/11/2026 (शनि) से हरि वासर प्रातःकाल के बाद तक रहता है, इसलिए पारण हरि वासर समाप्त होने पर मध्याह्न के बाद किया जाता है।स्मार्त और वैष्णव तिथियाँ — इस बार दोनों परम्पराओं की तिथि अलग है। स्मार्त: 20/11/2026 (शुक्र) वैष्णव (इस्कॉन): 21/11/2026 (शनि)
- स्मार्त 20/11/2026 (शुक्र) पारण · 21/11/2026 (शनि): से — हरि वासर प्रातःकाल के बाद तक रहता है, इसलिए पारण हरि वासर समाप्त होने पर मध्याह्न के बाद किया जाता है। स्मार्त: एकादशी किसी सूर्योदय को नहीं छूती (क्षय), इसलिए उसी दिन व्रत जिसमें वह आरम्भ और समाप्त होती है; अगला दिन वैकल्पिक गौण एकादशी है।
- वैष्णव (इस्कॉन) 21/11/2026 (शनि) पारण · 22/11/2026 (रवि): से — इस्कॉन (GCal) नियम: सूर्योदय से दिनमान का एक तिहाई तक। वैष्णव: एकादशी वाले दिन अरुणोदय में दशमी थी (दशमी-विद्धा) या एकादशी किसी सूर्योदय को नहीं छूती, इसलिए व्रत द्वादशी को।
गौण एकादशी (वैकल्पिक बाद वाला दिन): 21/11/2026 (शनि)
यही तिथि क्यों?
- स्मार्त: एकादशी किसी सूर्योदय को नहीं छूती (क्षय), इसलिए उसी दिन व्रत जिसमें वह आरम्भ और समाप्त होती है; अगला दिन वैकल्पिक गौण एकादशी है।
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शुक्रवार, 4 दिसंबर 2026
उत्पन्ना एकादशी
कार्तिक कृष्ण पक्ष (अमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष (पूर्णिमान्त)
पारण · 05/12/2026 (शनि) से हरि वासर समाप्त होने के बाद प्रातःकाल (दिन के प्रथम पंचमांश) में पारण।स्मार्त और वैष्णव तिथियाँ — दोनों परम्पराओं में व्रत इसी दिन है। स्मार्त: 04/12/2026 (शुक्र) वैष्णव (इस्कॉन): 04/12/2026 (शुक्र)
- स्मार्त 04/12/2026 (शुक्र) पारण · 05/12/2026 (शनि): से — हरि वासर समाप्त होने के बाद प्रातःकाल (दिन के प्रथम पंचमांश) में पारण। स्मार्त: इस दिन सूर्योदय के समय एकादशी है।
- वैष्णव (इस्कॉन) 04/12/2026 (शुक्र) पारण · 05/12/2026 (शनि): से — इस्कॉन (GCal) नियम: सूर्योदय से दिनमान का एक तिहाई तक। वैष्णव: शुद्ध एकादशी — सूर्योदय से 96 मिनट पहले, अरुणोदय में ही एकादशी चल रही है।
यही तिथि क्यों?
- स्मार्त: इस दिन सूर्योदय के समय एकादशी है।
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रविवार, 20 दिसंबर 2026
मोक्षदा एकादशी
मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष (अमान्त और पूर्णिमान्त में एक ही नाम)
पारण · 21/12/2026 (सोम) से हरि वासर समाप्त होने के बाद प्रातःकाल (दिन के प्रथम पंचमांश) में पारण।स्मार्त और वैष्णव तिथियाँ — दोनों परम्पराओं में व्रत इसी दिन है। स्मार्त: 20/12/2026 (रवि) वैष्णव (इस्कॉन): 20/12/2026 (रवि)
- स्मार्त 20/12/2026 (रवि) पारण · 21/12/2026 (सोम): से — हरि वासर समाप्त होने के बाद प्रातःकाल (दिन के प्रथम पंचमांश) में पारण। स्मार्त: इस दिन सूर्योदय के समय एकादशी है।
- वैष्णव (इस्कॉन) 20/12/2026 (रवि) पारण · 21/12/2026 (सोम): से — इस्कॉन (GCal) नियम: सूर्योदय से दिनमान का एक तिहाई तक। वैष्णव: शुद्ध एकादशी — सूर्योदय से 96 मिनट पहले, अरुणोदय में ही एकादशी चल रही है।
यही तिथि क्यों?
- स्मार्त: इस दिन सूर्योदय के समय एकादशी है।
प्रयुक्त नियम
पारण (व्रत खोलना)
पारण एकादशी के अगले दिन, सूर्योदय के बाद, द्वादशी रहते हुए किया जाता है। इसे प्रातःकाल (दिन के प्रथम पंचमांश) में करना श्रेष्ठ है और हरि वासर के कारण विवशता न हो तो मध्याह्न तक टालना नहीं चाहिए।
हरि वासर
हरि वासर द्वादशी तिथि का पहला चौथाई भाग है। हरि वासर में पारण नहीं किया जाता। यदि हरि वासर प्रातःकाल के बाद तक रहे, तो पारण हरि वासर समाप्त होने पर मध्याह्न के बाद किया जाता है।
स्मार्त और वैष्णव नियम
स्मार्त नियम (अधिकांश उत्तर भारतीय पंचांगों की तरह): व्रत उस दिन जब सूर्योदय पर एकादशी हो। एकादशी दो सूर्योदयों को छुए तो गृहस्थ पहले दिन व्रत रखें — पर यदि दूसरे दिन के बाद के सूर्योदय पर भी द्वादशी हो तो सभी दूसरे दिन। यदि एकादशी वाले दिन के बाद के सूर्योदय से पहले द्वादशी समाप्त हो जाए (पारण के लिए द्वादशी न बचे) तो व्रत पिछले दिन। जो एकादशी किसी सूर्योदय को न छुए, वह उसी दिन जिसमें वह आरम्भ और समाप्त हो।
वैष्णव नियम (इस्कॉन / गौड़ीय पंचांग, GCal प्रोग्राम द्वारा लागू हरि भक्ति विलास): अरुणोदय में, सूर्योदय से 96 मिनट (2 मुहूर्त) पहले, एकादशी चल रही होनी चाहिए; तब तक दशमी हो तो व्रत द्वादशी को। आठ महाद्वादशियाँ भी व्रत का दिन बदलती या तय करती हैं (नीचे सूची)। पारण सूर्योदय से, या द्वादशी के पहले चौथाई भाग की समाप्ति से, दिनमान के एक तिहाई या द्वादशी की समाप्ति (जो पहले हो) तक। दोनों तिथियाँ सदा दिखाई जाती हैं; आपकी गणना प्रोफ़ाइल तय करती है कि कौन पहले दिखे।
गौण एकादशी
जब एकादशी दो दिनों में फैली हो, तो कुछ पंचांग बाद वाले दिन को गौण एकादशी के रूप में देते हैं। गृहस्थ प्रायः पहला दिन रखते हैं; बाद वाला दिन कुछ संन्यासी और वैष्णव रखते हैं। दोनों दिखाए गए हैं ताकि आप अपनी पारिवारिक परम्परा का पालन कर सकें।
आठ महाद्वादशियाँ (वैष्णव)
वैष्णव तिथियाँ GCal की तरह आपके स्थान के लिए गणित होती हैं; सूर्योदय के पास तिथि समाप्त होने पर शहरों में एक दिन का अन्तर हो सकता है।
परम्पराएँ क्षेत्र और पंचांग पद्धति के अनुसार भिन्न हो सकती हैं। समय चयनित स्थान, समय क्षेत्र और गणना प्रोफ़ाइल के अनुसार दिखाए गए हैं।
अन्य हिन्दू पंचांग सूचियाँ
व्रत, एकादशी, श्राद्ध, संक्रान्ति और ध्यान रखने योग्य काल — सब आपके स्थान के लिए गणित।