गोचर (ग्रहों का संचार)
नवग्रहों की वर्तमान निरयण स्थिति, उनके नक्षत्र और अगला राशि परिवर्तन।
राशिचक्र · मेष बाईं ओर
खगोलीय तथ्य
04/11/2026 16:00 की स्थिति
-
सूर्य
मार्गीतुला 17°46'46"
स्वाती · चरण 4
12 दिन में -
चन्द्र
मार्गीसिंह 20°18'50"
पूर्वा फाल्गुनी · चरण 3
कल -
मंगल
मार्गीकर्क 26°05'42"
आश्लेषा · चरण 3
8 दिन में -
बुध
वक्रीतुला 18°09'25"
स्वाती · चरण 4
28 दिन में -
गुरु
मार्गीसिंह 0°29'18"
मघा · चरण 1
81 दिन में (वक्री गति से) -
शुक्र
वक्रीतुला 0°29'06"
चित्रा · चरण 3
कल (वक्री गति से) -
शनि
वक्रीमीन 14°50'08"
उत्तरा भाद्रपद · चरण 4
211 दिन में -
राहु
वक्रीकुम्भ 1°39'12"
धनिष्ठा · चरण 3
31 दिन में (वक्री गति से) -
केतु
वक्रीसिंह 1°39'12"
मघा · चरण 1
31 दिन में (वक्री गति से)
स्थितियाँ निकटतम 10 मिनट तक पूर्णांकित हैं। राशि परिवर्तन के समय चुने गए स्थान के समय-क्षेत्र में हैं और लगभग एक मिनट तक सटीक हैं।
प्रोफ़ाइल: उत्तर भारतीय · लाहिरी (समायोजित); अयनांश: लाहिरी (समायोजित); राहु/केतु: मध्यम पात।
जन्म कुण्डली के सापेक्ष गोचर
अपनी सहेजी गई जन्म प्रोफ़ाइलों के लग्न और चन्द्रमा से गिना गया गोचर देखने के लिए साइन इन करें। साइन इन
पारम्परिक व्याख्या
गोचर में संचार करते ग्रहों को परम्परागत रूप से जन्म चन्द्र राशि से (और ज्ञात हो तो लग्न से भी) गिना जाता है। हर ग्रह के कुछ भाव उसके गोचर के लिए परम्परागत रूप से शुभ माने जाते हैं।
ये सामान्य दिशानिर्देश हैं। शास्त्रीय ग्रन्थ इन्हें वेध, अष्टकवर्ग और चल रही दशा से परिष्कृत करते हैं, इसलिए गोचर को पूरी कुण्डली के साथ पढ़ा जाता है।
परम्पराएँ क्षेत्र और पंचांग पद्धति के अनुसार भिन्न हो सकती हैं। समय चयनित स्थान, समय क्षेत्र और गणना प्रोफ़ाइल के अनुसार दिखाए गए हैं।
नवग्रहों से सम्बन्धित पारम्परिक भक्ति सामग्री
कुछ ज्योतिष परम्पराएँ इन साधनाओं को किसी ग्रह से जोड़ती हैं। इन्हें पारम्परिक साधना के रूप में बताया गया है; किसी परिणाम की गारण्टी नहीं है, और ये चिकित्सा, आर्थिक या अन्य व्यावसायिक सलाह का विकल्प नहीं हैं।